
बडा सा घर छोटा सा इंसान किसी को खोज रहा था,शायद खुदको कहाँ मिलूंगा घर में बहुत खोजा जब न मिला निकल पड़ा घर से,नदी के किनारे एक पुराने मंदिर पर मेरी खोज खत्म हुई सोचा आवाज देकर बुला लू पर थोडा दर रहा था कहीं आवाज सुनकर यहाँ से भी न भाग जाये,दबे पैर मंदिर में घुसा,मंदिर कि खूबसूरत नक्कासी के बीच नदी कि किनारे भगवान से बातें करते सादू उसके यहीं कहीं होने का संकेत दे रहे थे संसार से थका मंदिर कि सीडियो पैर बैठ गया सोचा उससे ही पूछ लू कहा हे वो आँखें बंद कि और घुल गया खुदमे।
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