Wednesday, 15 January 2014

MY FIRST LESSON OF MUSIC!

                            

डूबकर जाना कि तू गहरा कितना है,यूँ तो कई बार तैरकर तेरे किनारो को छुआ था,फिर गोता लगाया ये सोचकर कि अबके तेरी ज़मीन से कंकड़ उठाकर ही लाऊंगा,डूबता गया डूबता गया,आखिर लोटना पड़ा,इस सूरज को भी तो जल्दी हे तुझमे समाने कि,रात भर रहता है,संग फिर भी दिल नहीं भरता इसका?
  
हाँ सुना था थाओ नहीं है तेरा,ऊँची इमारतो क नीव तो गहरी ही होती है,माना कि तू गहरा है पर कुछ तो हे जिस पर तू ठहरा हैं ,बीस बाइस यही कुछ उम्र होगी उसकी जो संगीत के सागर से मोती लाने कि ज़िद पर था!
                            उम्र के इस पड़ाब पर दिल बेचैन रहता है,जानने सीखने कि इक्छा भी तीव्र होती है!मेरी भी इक्षा थी सुओ को जानने की!

गुरु ने कहा-सात सुर होते है!यह मैने पहली बार नाह सुना था,पर सुरो के बारे में इससे जायदा भी नहीं सुना था,खाने का मजा तो खाकर ही लिया जा सकता है,और फिर बनाने वाला वो हो तो क्या बात है!
                                    शिकन भरी उन उंगलियो ने हमोनियम के घर कि सीडियो पर ढुमकते हुए चलना शुरू कर दिया,कुछ आठ सात कदम चल रुक गई वहाँ,जहाँ से चली थी!उंगलियो के कैटवाक से पैदा हुए स्वर कानो के रस्ते सीधे दिल में उतर गए,सुरो को इतना सुन्दर और अलग अलग नहीं देखा था पहले कभी!

गुरु-इन्ही सात सुरो में दुनिया का संगीत समाया है!संगीत भाषा से परे है!
      भाषा बदल जाती है पर सुर वही रहते है!
      सुर मिठाई में छुपी शक्कर से होते है मिठाइया अलग ही सकती है पर शक्कर एक हैं!
                                    गुरु ने एक बटन दबाकर निकली आवाज़ से अपनी आवाज़ मिलाने को कहा,कुछ चार पांच प्रयास के बाद में ये करने में सफल हुआ!उन्होंने कहा अपनी आवाज़ को ध्यान से सुनो!मेरी आवाज़ ऐसी लग रही t थी जेसे  बच्चा अभी चलना सीखा हो,जिसके हर कदम पर उसके गिरने का डर होता है!मैंने अपनी लऄखाती आवाज़ को कभी नहीं सुना था लोग तो कहते थे कि अच्छा गाते हो,झूठ बोलते थे या सुना नहीं कभी!
                                क्लास ख़त्म हुई,गुरु को अलबिदा कहा,मन ख़ुशी से भरा था,जैसे कोई खजाना हाथ लग गया था खजाना ही तो था बस दरवाजा खोलने कि देर थी,बस चाबी मिल जाती!
                                 बैग से आईपॉड निकाला कानो में लगाके सीडीओ को कूदता फाँदता नीचे आ गया,गुरु कि हारमोनियम पर उंगलियो कि तरह,कुछ सीढिया लांगकर,जल्दी ही सीख जाउंगा,सात ही तो स्वर है!एक दिन में एक तो अगले सप्ताह तक,सोचता हुआ घर चला गया!
                                 अब में भी चलता हुँ!सूरज खड़कियो से देख रहा है,उसकी तो आदत है छेड़ने कि मुझे पता है मुझे अब जाना है!

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